विशेष संवाददाता
गाजीपुर)। गाजीपुर जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित दुल्लहपुर बाजार और उसके आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में युवक रोजी-रोटी के लिए गल्फ देशों में काम करते हैं। खासकर जलालाबाद ग्राम सभा से लगभग 1000 से अधिक लोग विभिन्न गल्फ देशों—दुबई, अबू धाबी, इजरायल, सऊदी, बहरीन, कतर आदि—में रोजगाररत हैं। इसी कारण जलालाबाद को क्षेत्र में ‘मिनी दुबई’ के नाम से भी पहचान मिलने लगी है।
लेकिन 28 फरवरी की दोपहर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते मतभेदों के बाद हुए हमलों ने वहां युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। इसका असर सीधे तौर पर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके बेटे और पति गल्फ देशों में काम कर रहे हैं। अमर उजाला की टीम जब जमीनी हकीकत जानने गांवों में पहुंची तो कई परिवार दहशत और चिंता के साए में नजर आए।
अबू धाबी में सायरन, भारतीय कामगारों में दहशत
जफरपुर गांव की बुजुर्ग महिला लालती देवी ने बताया कि उनका बेटा समुदु यादव नवंबर में दुबई से वापस आया था और 15 फरवरी को दोबारा अबू धाबी के लिए रवाना हुआ था। उनकी पत्नी संगीता देवी और मां लगातार मोबाइल पर उससे संपर्क में हैं, लेकिन हालात को लेकर परिवार बेहद चिंतित है।
मीडिया से बातचीत के दौरान समुदु यादव को अबू धाबी में फोन पर जोड़ा गया। बातचीत के बीच ही सायरन बजने की आवाज सुनाई दी। समुदु ने बताया कि वह अबू धाबी के पोपट एरिया में कार्यरत है, जहां लगभग 50 मीटर की दूरी पर अमेरिकी एयरवेज का कैंप स्थित है। रात करीब 2:30 बजे हमले के बाद अलार्म बज उठा था। पुलिस द्वारा लोगों को शेल्टर में रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मिसाइल के टुकड़ों से उनके कुछ साथी घायल भी हो गए हैं। पी बोर्ड कंपनी में भारत, पाकिस्तान और इंडोनेशिया के लगभग 2000 कामगार कार्यरत हैं। बाजार और बस सेवाएं बंद हैं, जिससे सभी कामगार दहशत के माहौल में जी रहे हैं।
इजरायल में भी परिवारों की चिंता बरकरार
मियनाबड़ा गांव की अनीता देवी ने बताया कि उनके पति श्री वकील चौहान वर्ष 2023 में इजरायल गए थे। उनसे लगातार बातचीत हो रही है और वे फिलहाल सुरक्षित जोन में हैं। बावजूद इसके, बमबारी और युद्ध की खबरों से परिवार के लोग चिंतित हैं।
कौशल्या देवी ने बताया कि उनके पति शंभू चौहान 27 फरवरी को दुबई के लिए रवाना हुए हैं, लेकिन अभी उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है।
अमेरिकी कैंप के पास काम कर रहे श्रमिक
जफरपुर गांव के मयंक चौहान ने बताया कि उनके भाई निखिल चौहान दुबई में फोरमैन के पद पर कार्यरत हैं और उनकी कंपनी अमेरिकी कैंप के पास स्थित है। हाल में वहां हमले की सूचना मिली है। हालांकि लगातार बातचीत हो रही है, फिर भी परिवार में भय का माहौल है।
रामपुर गांव के विभूति चौहान ने बताया कि उनका बेटा गोलू चौहान सोनापुर (दुबई) में काम करता है। वहां की स्थिति को लेकर पूरा परिवार चिंतित है।
गांवों में पसरा डर और बेबसी
गल्फ देशों के ताजा हालात को लेकर जब महिलाओं से बातचीत की गई तो कई की आंखें नम हो गईं। कुछ रोने लगीं तो कुछ पूरी तरह से चिंता में डूबी नजर आईं। परिवारों का कहना है कि वे हर पल मोबाइल फोन पर नजर गड़ाए रहते हैं और ईश्वर से अपने अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।
जलालाबाद और आसपास के गांवों की बड़ी आबादी की आजीविका गल्फ देशों पर निर्भर है। ऐसे में वहां किसी भी तरह के तनाव या युद्ध की स्थिति का सीधा असर यहां के सैकड़ों परिवारों पर पड़ता है। फिलहाल परिवारों को अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी और हालात सामान्य होने का इंतजार है।




