Friday, March 6, 2026
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हम गर्व से कहते हैं कि हमारा गांव दो सिद्धपीठ मठों के बीच स्थित है, श्री राम सिंह,रामहित कार्यक्रम संपन्न, मंगलम भवन का हुआ लोकार्पणरामहित कार्यक्रम संपन्न, मंगलम भवन का हुआ लोकार्पण

ज़खनिया (गाजीपुर)। जखनिया विकासखंड के अंतर्गत मंझनपुर कला गांव स्थित कानपुर प्रांत प्रचारक श्री राम जी के आवास पर सिद्ध पीठ हथियाराम मठ के महामंडलेश्वर भवानीनंदन यति जी महाराज के सानिध्य में “रामहित कार्यक्रम” वैदिक मंत्रोच्चार एवं भव्य पूजन-अर्चन के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर नव निर्मित “मंगलम भवन” का लोकार्पण भी किया गया, जहां आगे गुरु दक्षिणा कार्यक्रम संचालित होगा।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे विधान परिषद सदस्य विशाल सिंह चंचल, उपजिलाधिकारी अतुल कुमार, तहसीलदार ज्ञानेंद्र यादव, अरुण सिंह सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों ने आध्यात्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की। गांव और आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
गांव की आध्यात्मिक परंपरा पर वक्ताओं ने डाला प्रकाश
कानपुर प्रांत प्रचारक श्रीराम सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मंझनपुर कला गांव सदियों से संत-महात्माओं के सानिध्य में आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाता आया है। उन्होंने कहा, “जब लोग हमसे हमारे घर के बारे में पूछते हैं तो हम गर्व से कहते हैं कि हमारा गांव दो सिद्धपीठ मठों के बीच स्थित है।” उन्होंने इसे गांव की आध्यात्मिक पहचान बताया और कहा कि आज महामंडलेश्वर जी के सानिध्य में मंगलम भवन का लोकार्पण होना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।
“राम नाम ही भवसागर से पार का मार्ग” — महामंडलेश्वर
महामंडलेश्वर भवानीनंदन यति जी महाराज ने अपने प्रवचन में रामहित कार्यक्रम को अलौकिक बताते हुए कहा कि वैदिक मंत्रों के उच्चारण से पूरा वातावरण अध्यात्ममय हो गया है। उन्होंने कहा कि वेदों की वाणी हजारों वर्षों से मानव समाज को दिशा देती आई है और पूर्वजों से मिली शिक्षा-दीक्षा का ही परिणाम है कि यह परंपरा आज भी जीवित है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हंस दूध और पानी को अलग कर सकता है, वैसे ही विवेकवान व्यक्ति जीवन में सत और असत का भेद कर सकता है। “भवसागर से पार होने का सरल मंत्र ‘राम’ है। सात्विक भोजन और सात्विक जीवन ही मनुष्य को सही दिशा में ले जाता है,” उन्होंने कहा।
महामंडलेश्वर ने अपने तपस्वी जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वे पिछले 29 वर्षों से अन्न का त्याग कर स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं और कभी औषधि का सेवन नहीं किया। उन्होंने वर्तमान जीवनशैली में आए परिवर्तनों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिकता के साथ आध्यात्मिक मूल्यों को भी बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने तर्पण, अर्पण और समर्पण को जीवन में उतारने का संदेश दिया।
विशाल जनसमूह की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में रणजीत सिंह, प्रभाकर जायसवाल, रिपुंजय सिंह, प्राचार्य प्रोफेसर बृजेश जायसवाल, रामाधार गुप्ता सहित अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर संतोष मिश्रा ने किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, श्रद्धा और अनुशासन का वातावरण बना रहा।

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