शैलेन्द्र यादव संवाददाता
दुल्लहपुर (गाज़ीपुर)।
जखनिया विकासखंड के अंतर्गत स्थित जलालाबाद गांव, जिसकी आबादी लगभग 25 हजार है और जो क्षेत्र का सबसे बड़ा गांव माना जाता है, इन दिनों स्वच्छता व्यवस्था की बदहाली से जूझ रहा है। बीते लगभग दो महीनों से सफाई कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण स्वच्छ भारत अभियान की तस्वीर यहां पूरी तरह धराशाई नजर आ रही है।
गांव की नालियां जगह-जगह जाम पड़ी हैं, गलियों और सड़कों पर कूड़े का अंबार लगा हुआ है। जलालाबाद ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों स्थानों पर गंदगी का आलम ऐसा है कि ग्रामीणों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुर्गंध और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से लोगों में बीमारियों का भी डर सताने लगा है।
इस संबंध में ग्राम प्रधान कार्यवाहक अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराने के लिए उन्होंने उच्च अधिकारियों को कई बार अवगत कराते हुए शीघ्र सफाई कर्मचारियों की तैनाती की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। सफाई कर्मचारियों के अभाव में नालियां जाम हैं और हालात ऐसे बन गए हैं कि कई जगह ग्रामीणों को खुद ही सफाई करने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
वहीं इस मामले में डीपीआरओ रमेश चंद्र उपाध्याय से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि गांव में पहले टीम बनाकर सफाई कराई गई थी। पूर्व में तैनात पांच सफाई कर्मचारियों को निलंबित किया गया था, जिनकी जांच रिपोर्ट अब प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही गांव में सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी, साथ ही यह भी कहा कि कुछ सफाई कर्मचारी फिलहाल अन्य गांवों में नियुक्त हैं।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग कब तक 25 हजार की आबादी वाले इस बड़े गांव को गंदगी से निजात दिला पाते हैं, या फिर ग्रामीणों को यूं ही स्वच्छता की अनदेखी झेलनी पड़ेगी।
