विशेष संवाददाता




लखनऊ – कांशीराम जयंती के जरिए सपा साधेगी दलित वोट बैंक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सामाजिक समीकरणों को साधने की कवायद तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने 15 मार्च को बहुजन आंदोलन के प्रणेता कांशीराम की जयंती को बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी इस आयोजन को दलित समाज तक अपनी पहुंच मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सभी जिला और महानगर इकाइयों को निर्देश जारी कर जयंती कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से आयोजित करने को कहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, हर जिले में संगोष्ठी, विचार गोष्ठी और सम्मान समारोह आयोजित कर दलित समाज के लोगों को बड़ी संख्या में जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
PDA दिवस के रूप में मनाने की तैयारी
सपा इस बार कांशीराम जयंती को ‘PDA दिवस’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के रूप में मनाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि दलित और पिछड़े वर्गों का मजबूत गठजोड़ 2027 के विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बहुजन समाज की राजनीति के केंद्र में रहे कांशीराम के नाम पर कार्यक्रम आयोजित कर सपा दलित मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास कर रही है। विशेष रूप से बसपा के कमजोर होते जनाधार के बीच सपा इस अवसर को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मान रही है।
2027 की रणनीति पर फोकस
समाजवादी पार्टी की रणनीति साफ तौर पर सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की है। दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के गठजोड़ को फिर से सक्रिय कर पार्टी 2027 के चुनावी रण की तैयारी में जुट गई है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांशीराम जयंती के कार्यक्रमों के जरिए सपा जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने के साथ-साथ सामाजिक संदेश देने की भी कोशिश करेगी।
कुल मिलाकर, 15 मार्च का आयोजन सिर्फ एक जयंती कार्यक्रम नहीं बल्कि 2027 के चुनावी समीकरणों की दिशा तय करने वाला राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।
