दुल्लहपुर (गाज़ीपुर)।
दुल्लहपुर क्षेत्र के शंकर सिंह गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र, जिसे वर्ष 2015 में तत्कालीन सांसद व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा द्वारा गांव को आदर्श घोषित किए जाने के बाद कायाकल्प योजना के तहत विकसित किया गया था, आज व्यवस्था की विडंबना का प्रतीक बनकर रह गया है।
आदर्श गांव घोषित होने के बाद केंद्र के एक बड़े कक्ष को ‘नोकिया सेंटर’ के रूप में कंप्यूटर कक्ष में परिवर्तित किया गया था, ताकि बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा सके। वहीं दूसरे कक्ष को किचन रूम के रूप में विकसित कर आंगनबाड़ी संचालन की व्यवस्था की गई।
लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग नजर आई। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां न तो नियमित रूप से आंगनबाड़ी संचालित हो रही है और न ही बच्चों की उपस्थिति दिखती है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह केंद्र अब महज “डेमो” या “शो-पीस” बनकर रह गया है।
देवा गांव में भी बदहाल स्थिति
इसी क्रम में देवा गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण दोपहर 12:18 बजे किया गया, जहां मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला। केंद्र के बाहर दो कुत्ते सोते हुए नजर आए, जबकि अंदर फर्श पर बकरी की गंदगी पड़ी थी। इससे स्पष्ट होता है कि केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा है और साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है।
सीडीपीओ ने कहा – जांच कराई जाएगी
इस संबंध में जब सीडीपीओ बिन्नी यादव से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि उनकी हाल ही में जखनिया में नियुक्ति हुई है और वर्तमान में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। कुछ कर्मचारी जिला मुख्यालय पर तो कुछ ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण में हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि मामले की जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


