सिंदुरिया/महराजगंज। बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार दोपहर सिंदुरिया थाना क्षेत्र के ग्राम सभा सिसवनिया में बिजली के पोल पर चढ़कर लाइन का काम कर रहे 28 वर्षीय युवक की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसे के बाद विभाग द्वारा मृतक को अपना लाइनमैन मानने से इनकार किए जाने से मामला और संदिग्ध हो गया है।
मृतक की पहचान ब्रह्मानंद पुत्र पूरन, निवासी मुंडेरा कला, सदर कोतवाली महराजगंज के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि बुधवार करीब दो बजे वह सिसवनिया गांव में बिजली के पोल पर चढ़कर लाइन बनाने/डिस बदलने का काम कर रहा था। इसी दौरान अचानक लाइन में करंट प्रवाहित हो गया और वह पोल से चिपक गया। करंट लगने से वह गंभीर रूप से झुलस गया। उसके नाक और कान से खून निकलने की बात भी सामने आई है। बाद में उसकी मौत हो गई।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि लाइन का ब्रेकडाउन लिया गया था तो पोल पर काम कर रहे युवक तक करंट कैसे पहुंचा? क्या लाइन में दोबारा बिजली सप्लाई बहाल की गई या ब्रेकडाउन की प्रक्रिया में लापरवाही हुई? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
बताया जा रहा है कि मृतक लंबे समय से बिजली लाइन से जुड़े काम में एक लाइनमैन के साथ आता-जाता और काम करता था। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि लाइनमैन के कहने पर अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा संबंधित लाइन का शटडाउन/ब्रेकडाउन लिया जाता था और काम पूरा होने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल की जाती थी। ऐसे में विभाग का यह कहना कि मृतक उसका लाइनमैन ही नहीं था, कई सवाल खड़े करता है।
सबसे अहम सवाल यह है कि यदि मृतक विभागीय लाइनमैन नहीं था तो वह बिजली लाइन पर काम कैसे कर रहा था? उसे काम करने की अनुमति किसने दी? ब्रेकडाउन किसके कहने पर लिया गया? बिजली आपूर्ति बहाल करने की सूचना किसे दी गई? और सबसे महत्वपूर्ण, काम के दौरान लाइन में करंट कैसे आया?
इन सवालों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। मामला केवल एक युवक की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्था, ठेकेदार की जिम्मेदारी और अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि वर्षों से गैर-विभागीय व्यक्ति बिजली लाइन से जुड़े कार्य कर रहा था तो उसकी निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी, यह भी जांच का विषय है।
एई प्रभात सिंह ने कहा कि मृतक उनका लाइनमैन नहीं था। वह किसके साथ काम करने जाता था, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके कॉन्ट्रैक्टर की सूची में दर्ज लाइनमैनों को ही सरकारी लाभ दिया जाएगा।
फिलहाल मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था—तकनीकी चूक, लापरवाही या बिजली आपूर्ति बहाल करने में हुई कोई गंभीर गलती—यह जांच का विषय है। परिजनों और ग्रामीणों के सवालों का जवाब तभी मिल सकेगा, जब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी। घटना की प्राथमिकी और तकनीकी जांच के बिना मामले की पूरी तस्वीर साफ होना मुश्किल है।
