विशेष संवाददाता
प्रयागराज। नशीले पदार्थ के तौर पर कथित रूप से इस्तेमाल किए जा रहे कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध खरीद-फरोख्त और सप्लाई से जुड़े बहुचर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने मामले में 17 आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि 57 अन्य आरोपियों को नियमित जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कथित सिंडिकेट के मुख्य आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया। जमानत याचिका खारिज होने के बाद भोला प्रसाद, विभोर राणा, अंकुश सिंह और बादल आर्य समेत 17 आरोपी फिलहाल जेल में ही रहेंगे।
वहीं, जमानत पाने वाले 57 आरोपियों में 17 आरोपी वाराणसी जिले से संबंधित बताए जा रहे हैं।
मुख्य आरोपियों को नहीं मिली राहत
हाईकोर्ट ने कथित कफ सिरप सिंडिकेट के प्रमुख आरोपियों की जमानत अर्जियों को खारिज करते हुए उन्हें राहत नहीं दी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामले में बड़े पैमाने पर कोडीन युक्त कफ सिरप की कथित अवैध खरीद, बिक्री और सप्लाई का नेटवर्क संचालित होने के आरोप हैं।
फर्जी बिल और बड़े लेनदेन का आरोप
सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने जमानत याचिकाओं का विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में आरोप लगाया कि कथित नेटवर्क में बड़े पैमाने पर लेनदेन किए गए और फर्जी बिलों के माध्यम से कफ सिरप की खरीद-फरोख्त की गई।
अभियोजन के मुताबिक, आरोपियों की ओर से बड़ी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप के स्रोत और उसकी कथित अंतिम88 उप ⁰⁰⁰ सप्लाई के संबंध में पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सका।
आरोपियों ने खुद को बताया लाइसेंसधारी
आरोपियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वे वैध लाइसेंस धारक हैं और उन्हें मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अलग-अलग आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाया।
जमानत का मतलब बरी होना नहीं
मामले की जांच अभी जारी है। जिन आरोपियों को जमानत मिली है, उन्हें आरोपों से बरी नहीं माना जाएगा। कथित अवैध सप्लाई नेटवर्क, लेनदेन और अलग-अलग आरोपियों की भूमिका की जांच के बाद आगे की न्यायिक कार्यवाही में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अंतिम फैसला होगा।



