गाजीपुर: जनपद का जखनियां विकास खंड, जो कभी एक किराये के मकान से शुरू हुआ था, आज अपनी एक अलग पहचान रखता है। मंगई और वेशों नदी के आगोश में बसा यह कृषि प्रधान ब्लॉक आज विकास की बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक उपेक्षा के बीच झूल रहा है।
इतिहास के पन्नों से जखनियां
सन 1965 में बैजनाथ गुप्ता और जगरनाथ गुप्ता के मकान में किराये पर शुरू हुआ जखनियां ब्लॉक, खंड विकास अधिकारी पाल साहब और तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख स्वर्गीय जय किशन सिंह के कुशल नेतृत्व में आगे बढ़ा। सन 1970 में ब्लॉक का अपना भव्य भवन बनकर तैयार हुआ। आज यह ब्लॉक आजमगढ़ और मऊ जिले की सीमा पर एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसकी 90 ग्राम पंचायतें इसकी ताकत हैं।
नगरपालिका की आस, फाइलों में दफन
अलीपुर मदरा, कौला जखनियां, गोविंद जखनियां और गौरा खास—इन चार गांवों की कुल आबादी 20,000 के पार है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि इन गांवों को मिलाकर एक ‘नगरपालिका’ या ‘टाउन एरिया’ घोषित किया जाए। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सर्वानंद उर्फ झुन्ना सिंह का कहना है कि इसके लिए कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन यह मांग वर्षों से फाइलों में दबी है। नगरपालिका बनने से यहाँ के विकास को रफ्तार मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
किसानों की मायूसी और मंडियों का अभाव
कृषि प्रधान ब्लॉक होने के बावजूद, जखनियां के किसानों के पास अपनी फसल बेचने के लिए कोई उचित मंडी नहीं है। सर्वदलीय जन कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष देवनारायण सिंह कहते हैं, “मंडी न होने के कारण किसानों को अपनी उपज कौड़ियों के भाव बेचने या जंगीपुर, चिरैयाकोट और सैदपुर तक ढोने को मजबूर होना पड़ता है।” वहीं, पंडित सर्वानंद चौबे ने शारदा सहायक नहर (32) में पानी न आने से सिंचाई की गंभीर समस्या की ओर इशारा किया है।
बुनियादी सुविधाओं का टोटा
न्यायालय का संकट: काफी जद्दोजहद के बाद मिली ग्राम न्यायालय की सुविधा अब ठप पड़ी है। दो माह से न्यायाधीश की नियुक्ति न होने से ग्रामीणों को न्याय के लिए सैदपुर की दौड़ लगानी पड़ रही है।
यातायात का झमेला: जखनियां मुख्य बाजार में बस स्टैंड का अभाव है। यात्रियों को अपनी बस के इंतजार में दुकानों के बाहर शरण लेनी पड़ती है।
स्वास्थ्य सेवाएं: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर प्रतिदिन 200 से 300 मरीज आते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव यहाँ के मरीजों के लिए बड़ी चुनौती है।
रोजगार के लिए पलायन को मजबूर युवा
क्षेत्र में किसी भी बड़े उद्योग या कारखाने के न होने से युवाओं का भविष्य अंधकार में है। रोजी-रोटी की तलाश में अधिकांश युवा गैर-प्रांतों में जाकर मजदूरी करने को मजबूर हैं। कुछ किस्मत वाले जरूर खाड़ी देशों तक पहुँचकर अपना जीवन सुधार पाए हैं, लेकिन एक बड़ी आबादी अभी भी संघर्ष कर रही है।
जखनियां का हर नागरिक आज सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहा है—आखिर कब तक विकास की मुख्य धारा से दूर रहेगा यह ऐतिहासिक ब्लॉक?
विकास की बाट जोहता जखनियां: गौरवशाली इतिहास, लेकिन भविष्य पर सवालो का ‘अधर’
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