रमेश प्रसाद सोनी
अयोध्या, 27 मार्च 2026। पावन नगरी अयोध्या में स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर एक बार फिर दिव्य आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा, जब भगवान राम लला का विधिवत अभिषेक भव्य रूप से संपन्न हुआ।
इस पावन अवसर पर मंदिर प्रांगण में वैदिक मंत्रोच्चार, घंटों-घड़ियालों की गूंज और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया। पुजारियों द्वारा विधि-विधान से किए गए अभिषेक के दौरान भक्तों की श्रद्धा अपने चरम पर नजर आई।
अभिषेक के उपरांत आयोजित सूर्य तिलक का दिव्य दृश्य देखते ही बनता था। जैसे ही सूर्य की किरणें मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचीं, उन्होंने प्रभु श्रीराम के मस्तक को स्पर्श कर तिलक किया। यह अलौकिक क्षण उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया। सूर्य की सुनहरी किरणों से आलोकित रामलला की छवि ने पूरे वातावरण को दिव्यता, ऊर्जा और सकारात्मकता से भर दिया।
यह अद्भुत आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा और वैज्ञानिक समन्वय का भी उत्कृष्ट उदाहरण बना। सूर्य तिलक की यह विशेष व्यवस्था इस प्रकार की गई है कि वर्ष में निश्चित समय पर सूर्य की किरणें सीधे भगवान के मस्तक पर पड़ती हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का अनूठा अनुभव प्रस्तुत करती है।
देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने इस पावन क्षण के साक्षी बनकर स्वयं को धन्य महसूस किया। पूरा अयोध्या धाम “जय श्री राम” के उद्घोष से गूंजता रहा और हर ओर भक्ति, उल्लास एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार देखने को मिला।
यह दिव्य आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करता रहा।



