अशोक सिंह संवाददाता
मेंहनगर (आजमगढ़):
स्थानीय तहसील अंतर्गत बिजली विभाग की घोर लापरवाही के चलते क्षेत्र में भीषण बिजली संकट उत्पन्न हो गया है। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों में 18 से 20 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा कर रही है, वहीं मेंहनगर में स्थिति इसके ठीक उलट बनी हुई है। यहां के निवासियों को मुश्किल से 7 से 8 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
पढ़ाई के समय ही गुल हो जाती है बत्ती
विद्युत आपूर्ति का शेड्यूल इतना बदहाल है कि ठीक बच्चों की पढ़ाई के समय ही बिजली गायब कर दी जाती है। प्रतिदिन शाम 5 बजे कटने वाली बिजली सीधे देर रात 11 बजे आती है। इसके बाद रात 1 बजे पुनः बिजली काट दी जाती है, जो अगली सुबह 5 बजे बहाल होती है। इस मनमाने टाइम-टेबल के कारण स्कूली और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का पठन-पाठन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।
सिंचाई न होने से धान की फसल पर संकट
बिजली की इस आंख-मिचौनी का सीधा असर क्षेत्र के किसानों पर पड़ रहा है। वर्तमान में धान की फसल को पानी की बेहद सख्त आवश्यकता है, लेकिन समय पर बिजली न मिलने से खेतों की सिंचाई बाधित हो रही है। किसानों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो उनकी फसल सूख जाएगी और भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
शासन की मंशा पर फिरा पानी, आंदोलन के आसार
बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली शासन की मंशा के ठीक विपरीत नजर आ रही है। स्थानीय लोगों में विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं किया गया और तय शेड्यूल के अनुसार बिजली नहीं दी गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। इस स्थिति में होने वाले किसी भी विरोध-प्रदर्शन और शांति-व्यवस्था की जिम्मेदारी पूर्ण रूप से बिजली विभाग की होगी।
