अमित चौबे जिला संवाददाता
मऊ। अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथित अपमान के बाद भावुक होकर रोते हुए इस्तीफा देने के प्रकरण से चर्चा में आए प्रशांत कुमार सिंह पर अब फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने का गंभीर आरोप सामने आया है। सवाल यह उठ रहा है कि यह मामला ऐसे संवेदनशील समय पर ही क्यों उजागर हुआ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह प्रकरण अब विभागीय जांच के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले के शिकायतकर्ता स्वयं प्रशांत कुमार सिंह के सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह हैं। उन्होंने ही संबंधित विभागों में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि प्रशांत ने कथित तौर पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का सहारा लेकर सरकारी सेवा हासिल की।
सूत्रों के मुताबिक, विभागीय स्तर पर गठित मेडिकल बोर्ड के समक्ष प्रशांत कुमार सिंह को कई बार उपस्थित होने के लिए बुलाया गया, लेकिन वह लगातार बोर्ड के सामने पेश नहीं हो रहे हैं। इसी क्रम में मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) द्वारा दिनांक 19 दिसंबर 2025 को महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं को पत्र भेजा गया था। इस पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि संबंधित अधिकारी बार-बार बुलाए जाने के बावजूद मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित नहीं हो रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विभागीय हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग यह सवाल कर रहे हैं कि यदि आरोप निराधार हैं तो मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही। वहीं, मामले में अपनों के ही शिकायतकर्ता बनने को लेकर “हमें अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम” जैसी कहावत भी चर्चा में है।
फिलहाल, विभागीय जांच अपने निर्णायक मोड़ पर बताई जा रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच का निष्कर्ष क्या आता है और क्या प्रशांत कुमार सिंह के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई की जाती है या नहीं।
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पर नौकरी का आरोप: GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह की बढ़ीं मुश्किलें
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