Tuesday, September 8, 2026
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भाजपा नेताओं का गंभीर आरोप, कोतवाल ने आरोपों को बताया सरासर गलत: जखनिया में पुलिस-नेता खींचतान तेज

विशेष संवाददाता

ज़खनिया ​गाजीपुर। जखनिया शिव मंदिर परिसर में मंगलवार शाम 5:00 बजे भारतीय जनता पार्टी मंडल जखनिया प्रथम की एक अति आवश्यक बैठक आयोजित की गई। मंडल महामंत्री पीयूष कुमार सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान और क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
​कोतवाल पर अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का आरोप
बैठक के दौरान मंडल महामंत्री पीयूष कुमार सिंह ने एक प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि भुड़कुड़ा कोतवाल द्वारा भाजपा मंडल अध्यक्ष एवं अन्य कार्यकर्ताओं के प्रति कथित रूप से अपमानजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है। उन्होंने इसे अत्यंत निंदनीय और बर्दाश्त के बाहर बताया। बैठक में मौजूद सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस विषय को बेहद गंभीरता से लिया और एकजुट होकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
​9 सितंबर को एसडीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन
बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया गया कि आगामी 9 सितंबर को सुबह 11:00 बजे भाजपा कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल उप जिलाधिकारी (SDM) जखनिया से मुलाकात करेगा। इस दौरान एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पुलिस अधिकारी पर तत्काल उचित कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की जाएगी।
​इस महत्वपूर्ण बैठक में उमाशंकर यादव, प्रशांत सिंह सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
​कोतवाल का पलटवार: आरोप पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत
दूसरी ओर, जब इस संबंध में भुड़कुड़ा कोतवाल धर्मेंद्र कुमार पांडे से बात की गई, तो उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। कोतवाल ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया:
​”मैंने किसी भी भाजपा कार्यकर्ता या जनप्रतिनिधि के प्रति कभी भी किसी तरह की अमर्यादित या असम्मानजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया है। मुझ पर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से मिथ्या, गलत और निराधार हैं।”
​तनाव के आसार, जांच पर टिकी निगाहें
पुलिस और सत्तारूढ़ दल के स्थानीय नेताओं के बीच उपजे इस गतिरोध से क्षेत्र का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। अब सभी की निगाहें 9 सितंबर को दिए जाने वाले ज्ञापन और उसके बाद उप जिलाधिकारी द्वारा की जाने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिक गई हैं।

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