Tuesday, July 21, 2026
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DM साहब सुनिए:अंधी हु,कमाती नही,लेखपाल ने रिश्वत ना देने पर लिख दी 48 हजार की आय, रोकी पेंशन,शिकायत पर दी जारही धमकी

समाचार भारत ब्यूरो चीफ

सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज तहसील के ग्राम पड़री कलां निवासी शत प्रतिशत नेत्रहीन दुर्गावती पत्नी राजकुमार ने जिलाधिकारी, सोनभद्र को प्रार्थना पत्र देकर क्षेत्रीय लेखपाल पर रिश्वत न देने पर गलत आय दर्शाकर विकलांग पेंशन रोकने का गंभीर आरोप लगा है।जानकारी के अनुसार दुर्गावती पूर्ण रूप से नेत्रहीन हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी, सोनभद्र द्वारा जारी वैध विकलांग प्रमाण पत्र उनके पास उपलब्ध है। वह कोई हुनर नहीं जानतीं और 100% दिव्यांगता के कारण कोई आय अर्जित करने में असमर्थ हैं। विकलांग पेंशन हेतु पात्र होने के बावजूद क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा आय प्रमाण पत्र में उनकी वार्षिक आय 48,000 रुपये दर्शा दी गई। – पहला आवेदन सं. 262000010041326, प्रमाण पत्र सं. 702261013392, दिनांक 08.05.2026 – लेखपाल के कहने पर दोबारा आवेदन सं. 262000010044763, प्रमाण पत्र सं. 702261014045, दिनांक 19.05.2026 में भी पुनः आय 48,000 रुपये ही दर्शाई गई। – पेंशन योजना की पात्रता सीमा से अधिक आय दिखाने के कारण उनका आवेदन निरस्त हो रहा है। जनसुनवाई में लापरवाही: जनसुनवाई पोर्टल संदर्भ सं. 40020026009094 पर निस्तारण अधिकारी सुजाता सिंह द्वारा पीड़िता का बयान दर्ज किए बिना व बिना सुनवाई के ही मनमानी रिपोर्ट लगा दी गई।
धमकी व रिश्वत की मांग: पीड़िता का आरोप है कि जिलाधिकारी से शिकायत करने के बाद क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा धमकी दी जारही है की शिकायत वापस लो नही घर गिरवादेगें,बुलडोजर चलादेगें कोई बचा नही पाएगा अपनी उपर तक पहुंच की धौंस जमा रही है की मेरी पहुंच उपर तक है मेरी कोई कुछ नही कर पाएगा,लेखपाल द्वारा दोबारा शिकायत या आवेदन करने पर रिपोर्ट नहीं लगाई जानें और पेंशन से वंचित करने की धमकी दी जारही है पिडीत का आरोप है की लेखपाल द्वारा पैसे की मांग की गई नही देने पर गतल रिपोर्ट लगाकर पेंशन रोक दी पिडीत दुर्गावती ने जिलाधिकारी से मांग की है कि:संबंधित क्षेत्रीय लेखपाल के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।वास्तविक स्थिति के आधार पर शून्य/न्यूनतम आय दर्शाते हुए नया आय प्रमाण पत्र जारी किया जाए।विकलांग पेंशन योजना का लाभ अविलंब दिलाया जाए।पीड़िता का कहना है कि 100% नेत्रहीन होने के बावजूद 48,000 रुपये वार्षिक आय दर्शाना न केवल तथ्यहीन है बल्कि अमानवीय भी है। प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई गई है।

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