बरेली। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए कथित इस्तीफ़े को बेहद गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है। शंकराचार्य एवं उनके शिष्यों पर हुए लाठीचार्ज तथा प्रशासनिक दबाव की घटनाएं यह प्रश्न खड़ा करती हैं कि मौजूदा शासन व्यवस्था में संविधान, आस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कितनी सुरक्षित है।
इन घटनाक्रमों से प्रदेश की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। मामले की सच्चाई सामने आना आवश्यक है, ताकि जनता के बीच फैली आशंकाओं का समाधान हो सके।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में शासन भय से नहीं, बल्कि संविधान और कानून के अनुरूप चलाया जाना चाहिए। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता समय की मांग है।

