Monday, October 19, 2026
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गाजीपुर की बेटी साधना पाल ने रचा विश्व रिकॉर्ड, हाथ की कढ़ाई से उकेरा अभिनेता विजय थलपति का सूक्ष्म चित्र

ब्यूरो चीफ

राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने की सराहना, कहा—बेटियों की प्रतिभा को प्रोत्साहन देना समाज की जिम्मेदारी

गाजीपुर। जनपद की होनहार बेटी साधना पाल ने अपनी असाधारण कलात्मक प्रतिभा, अटूट लगन और अथक परिश्रम के बल पर अंतरराष्ट्रीय पटल पर गाजीपुर का मान बढ़ाया है। ग्राम बुढ़नपुर, पोस्ट शादियाबाद निवासी राजेंद्र पाल की सुपुत्री साधना ने दक्षिण भारतीय अभिनेता विजय थलपति का महज 2 × 1.5 इंच आकार का हाथ से कढ़ाई किया हुआ चेहरा-चित्र तैयार कर इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स—वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ऑफ एक्सीलेंस में अपना नाम दर्ज कराया है। उन्होंने यह उल्लेखनीय उपलब्धि 13 अगस्त 2026 को हासिल की।

इस गौरवपूर्ण सफलता के बाद सोमवार को साधना पाल राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत के छावनी लाइन स्थित कार्यालय पहुंचीं। यहां डॉ. बलवंत ने साधना से मुलाकात कर उनकी उपलब्धि की मुक्तकंठ से सराहना की तथा बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर डॉ. संगीता बलवंत ने कहा कि साधना ने अपनी रचनात्मक सोच, मेहनत और समर्पण से यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा किसी उम्र या सीमा की मोहताज नहीं होती। इतने छोटे आकार में हाथ की कढ़ाई के माध्यम से किसी चेहरे की बारीकियों को उकेरना असाधारण कौशल, धैर्य और एकाग्रता का परिचायक है। यह उपलब्धि साधना और उनके परिवार के साथ-साथ पूरे गाजीपुर जनपद के लिए गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि जनपद की बेटियों में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि उनकी प्रतिभा को पहचाना जाए, उन्हें प्रोत्साहित किया जाए और आगे बढ़ने के लिए उचित अवसर उपलब्ध कराए जाएं। साधना पाल जैसी प्रतिभाशाली बेटियों की सफलताएं समाज की अन्य बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इनसे बेटियों को अपने सपनों को साकार करने, अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने और अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की प्रेरणा मिलती है।

डॉ. संगीता बलवंत ने विश्वास जताया कि साधना भविष्य में भी अपनी कला के माध्यम से नई ऊंचाइयां हासिल करेंगी और गाजीपुर के साथ देश का नाम रोशन करेंगी।

साधना पाल की यह उपलब्धि साबित करती है कि जब प्रतिभा को मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति का साथ मिलता है, तो छोटी-सी कलाकृति भी विश्व पटल पर बड़ी पहचान बना सकती है। उनकी सफलता आज जनपद की बेटियों के लिए प्रेरणा और गाजीपुर के लिए गर्व का प्रतीक बन गई है।

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