Friday, March 6, 2026
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सरहद की हिफाजत करते-करते अमर हुआ वीर सपूत, बीमारी से ग्रसित होकर सैन्य नायक रोशन यादव का निधन, गांव में पसरा मातम

ज़खनिया गाजीपुर। देश की सरहदों की रक्षा करते हुए बीमारी से जूझ रहे गाजीपुर जिले के शादियाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत कनुँआँन गांव निवासी सैन्य नायक रोशन यादव (34 वर्ष) पुत्र राजेंद्र यादव का निधन हो गया। जैसे ही 25 जनवरी की सुबह करीब 9 बजे सैनिक मुख्यालय से परिजनों को यह मनहूस सूचना मिली, पूरे परिवार की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं। गांव से लेकर क्षेत्र भर में शोक की लहर दौड़ गई।
मृतक रोशन यादव दो भाई और दो बहनों में दूसरे स्थान पर थे। उन्होंने वर्ष 2013-14 में भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा का संकल्प लिया था और वर्तमान में नायक के पद पर कार्यरत थे। परिजनों के अनुसार उनकी तैनाती श्रीनगर में थी, जहां वे काफी समय से सांस लेने की गंभीर समस्या से पीड़ित थे। उपचार के दौरान 25 जनवरी को उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि उनका सेवानिवृत्त होना महज तीन वर्ष शेष था।
जैसे ही यह दुखद समाचार घर पहुंचा, मां शांति देवी और पत्नी शिखा देवी अपने आंसुओं को रोक न सकीं और दहाड़ें मारकर रोने लगीं। सूचना मिलते ही क्षेत्रवासियों का तांता लग गया, हर आंख नम और हर चेहरा गमगीन नजर आया।
दिल्ली से सैनिक सम्मान के साथ उनका पार्थिव शरीर बाबतपुर एयरपोर्ट लाया गया, जहां से गाजीपुर, बुजुगा, शादियाबाद, हंसराजपुर, जखनिया सहित कई स्थानों पर युवाओं ने जुलूस निकालकर नम आंखों से वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की। देशभक्ति नारों के बीच वातावरण गम और गर्व से भरा रहा।
बताया गया कि सैन्य नायक रोशन यादव ने श्री सर्वजीत सिंह इंटर कॉलेज, नेवादा दुर्गविजय राय से विज्ञान वर्ग में इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की थी। उनके निधन की सूचना मिलते ही विद्यालय के प्रधानाचार्य रामनारायण यादव ने विद्यालय बंद रखते हुए स्वयं स्टाफ के साथ उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता लल्लन राम, गरीब राम, संतोष यादव, अखिलेश यादव, पिंटू यादव, अभिषेक यादव, नीरज यादव, जगदीश तिवारी, अवधेश यादव, किशन दुबे, राजेश यादव, गोपाल यादव, हनुमान यादव, अंबिका यादव, डॉ. रजनीश सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। हालांकि किसी भी जनप्रतिनिधि के मौके पर न पहुंचने को लेकर लोगों ने नाराजगी भी जाहिर की।
वीर सपूत रोशन यादव का जाना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अपूरणीय क्षति है। गांव की गलियों में आज भी सन्नाटा और आंखों में देशभक्ति के आंसू हैं।

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