Tuesday, July 21, 2026
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गाजीपुर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: मुख्यमंत्री के निर्देश पर DPRO रमेश चंद्र उपाध्याय का तबादला, नमिता शरण संभालेंगी कमान

​गाजीपुर।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन के संकल्प और प्रदेश की सख्त तबादला नीति के अनुपालन में गुरुवार देर रात गाजीपुर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया। जिले में 3 साल 6 महीने का लंबा कार्यकाल पूरा कर चुके जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) रमेश चंद्र उपाध्याय का शासन के नियमानुसार स्थानांतरण कर दिया गया है। उनकी जगह सोनभद्र की जिला पंचायत राज अधिकारी नमिता शरण को गाजीपुर का नया DPRO नियुक्त किया गया है। शासन की नीति के अनुसार, किसी भी अधिकारी को एक जिले में 3 साल से अधिक समय तक तैनात नहीं रखा जा सकता।
​विदाई के समय याद आया रमेश चंद्र उपाध्याय का बेहतरीन कार्यकाल
​रमेश चंद्र उपाध्याय ग्राम पंचायत अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच एक बेहद लोकप्रिय और मिलनसार अधिकारी के रूप में जाने जाते रहे हैं। अपने साढ़े तीन साल से अधिक के कार्यकाल में उन्होंने जिले की पंचायतों में विकास कार्यों को नई गति दी। स्वच्छ भारत मिशन, पंचायत भवन निर्माण और 15वें वित्त आयोग के कार्यों में उनके महत्वपूर्ण योगदान की हर स्तर पर सराहना हो रही है।
​तबादले पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा:
​”शासन का आदेश सर्वोपरि है। गाजीपुर में काम करके मुझे बेहद संतुष्टि मिली। यहाँ के लोगों और टीम का पूरा सहयोग रहा। नई DPRO नमिता शरण जी को मेरी सहृदय शुभकामनाएं।”
​कौन हैं नई DPRO नमिता शरण? जानिए उनकी कार्यशैली:
​नमिता शरण को एक बेहद तेज-तर्रार और अनुशासित प्रशासनिक छवि के लिए जाना जाता है। उनसे जुड़ी कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
​सोनभद्र में शानदार रिकॉर्ड: नमिता शरण ने सोनभद्र में पंचायत स्तर पर पारदर्शिता लाने के लिए कई बेहतरीन नवाचार (Innovations) किए। वे मनरेगा और 15वें वित्त के कार्यों की जमीनी और सघन मॉनिटरिंग के लिए जानी जाती हैं।
​शासन की भरोसेमंद अधिकारी: भ्रष्टाचार मुक्त पंचायत राज की मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप सटीक परिणाम देने वाले अधिकारियों में उनकी गिनती होती है।
​गाजीपुर में क्या होगी प्राथमिकता: कार्यभार ग्रहण करने के बाद गाजीपुर की ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, समयबद्ध भुगतान और डिजिटल मॉनिटरिंग को दुरुस्त करना उनकी मुख्य प्राथमिकता रहेगी।
​तबादला नीति का संदेश: “3 साल पूरे तो कुर्सी खाली”
​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में सुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अधिकारियों का नियमित रोटेशन (तबादला) अत्यंत जरूरी है। शासन का मानना है कि समय पर होने वाले इन फेरबदलों से कार्य संस्कृति में नयापन आता है और विकास कार्यों को नई ऊर्जा मिलती है। इसी नीति के तहत गाजीपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में DPRO स्तर के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं।

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