Thursday, March 26, 2026
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पुलिस-लेखपाल की कथित मिलीभगत से रातों-रात कब्जा!

विशेष संवाददाता

पूजा यादव ने बाबा की पुस्तैनी जमीन पर बने मकान पर लगाया गंभीर आरोप, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व बृजेश पाठक को सौंपी शिकायत

डलमऊ थाना क्षेत्र के पूरे भागू नाथ खेड़ा लालगंज रोड पर एक चौंकाने वाला भूमि कब्जे का मामला सामने आया है। स्थानीय निवासी पूजा यादव ने आरोप लगाया है कि उनकी पुस्तैनी भूमिधरी जमीन पर विपक्षियों ने पुलिस और लेखपाल की कथित मिलीभगत से रातों-रात मकान खड़ा कर लिया। पीड़िता का कहना है कि यह जमीन उनके बाबा के नाम दर्ज है और वरासत का मुकदमा अभी न्यायालय में विचाराधीन है। फिर भी विपक्षियों ने प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर जबरन कब्जा कर लिया। पूजा यादव ने बताया कि जब उन्होंने उसी जमीन पर अपना मकान बनाने का प्रयास किया तो विपक्षियों ने लेखपाल और पुलिस की मदद से निर्माण कार्य रुकवा दिया। लेकिन महज कुछ दिनों बाद उन्हीं विपक्षियों ने बाहुबल और कथित प्रशासनिक संरक्षण के सहारे रातों-रात निर्माण शुरू कराकर पूरा मकान खड़ा कर लिया। पीड़िता ने आरोप लगाते हुए कहा, 7 मार्च की दिन-रात में विपक्षी रोहिणी पत्नी अनूप, उदयराज, दुर्गा प्रसाद, शैलेन्द्र और सत्येंद्र समेत अन्य लोगों ने पुलिस व लेखपाल से मिलकर निर्माण कार्य करवा लिया। इस दौरान उनके साथ कई दबंग और असामाजिक तत्व भी मौजूद थे, जिससे मैं विरोध भी नहीं कर सकी। पूजा यादव का आरोप है कि विपक्षी पक्ष ने न केवल बाबा की पुस्तैनी जमीन पर कब्जा किया, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से कानूनी प्रक्रिया को भी दरकिनार कर दिया। उन्होंने कई बार थाना प्रभारी, लेखपाल और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हुई। अंततः निराश होकर पूंजा यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ व उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व बृजेश पाठक को लिखित शिकायत सौंपी है और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासन की गोद में बैठे दबंगों का खेल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक भूमि विवाद नहीं, बल्कि पुलिस-लेखपाल और बाहुबलियों के गठजोड़ का जीता-जागता उदाहरण है। पूंजा यादव ने कहा, मेरी जमीन मेरे बाबा की है, कोर्ट में वारिसत का केस चल रहा है। फिर भी विपक्षी रातों-रात मकान बना लेते हैं और प्रशासन चुपचाप तमाशा देखता रहता है। क्या गरीबों के लिए न्याय सिर्फ कागजों तक सीमित है….? इस मामले में डलमऊ थाना प्रभारी और संबंधित लेखपाल से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों ही पक्षों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। वही पूजा यादव की शिकायत के बाद अब देखना यह होगा कि रायबरेली प्रशासन और पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या विपक्षियों और कथित मिलीभगत करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी या फिर मामला यूं ही दबा दिया जाएगा….? अगर निष्पक्ष जांच हुई तो यह गरीबों के अधिकारों की रक्षा का उदाहरण बनेगा, अन्यथा यह प्रशासनिक सिस्टम पर एक और सवाल खड़ा करेगा। स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व बृजेश पाठक स्वयं इस मामले का संज्ञान लें और दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में कोई और पीड़ित न्याय की गुहार लगाने के लिए मजबूर न हो।

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